एक थप्पड़ मारना किसी को इतना भारी पड़ेगा आप सोच भी नहीं सकते, भागलपुर का है मामलl

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भागलपुर कोर्ट में एक ऐसे केस की सुनवाई शुरू हुई जो 24 साल पुराना था. सुनवाई जैसे ही शुरू हुई माहौल गमगीन हो गया. 76 साल के बुजुर्ग अबू बकर ने कोर्ट रूम में जज से गुहार लगाई कि जज साहब बूढा हो गया हूं एक पांव कब्र में है अब तो सजा सुना दीजिए. जैसे ही अबू बकर ने यह बातें कही जज भी गंभीर हो गए. 76 वर्षीय अबू बकर अपने फैसले को लेकर एसीजेएम-14 की कोर्ट में पहुंचा था.  उस पर साधारण मारपीट का मुकदमा है. बस एक थप्पड़ मारने की वजह से वह 24 साल से कोर्ट के चक्कर लगा रहा है.

क्या है मामला

अबु बकर की दलील पर जब एसीजेएम आरके मिश्रा ने तारीखों से मोटी हो चुकी फाइल के अंतिम कागजातों को पढ़ना शुरू किया तो वे भी बुदबुदा पड़े… हद हो गई. अबु बकर की ओर से सीनियर वकील कामेश्वर पांडेय और उमेश पांडेय ने कोर्ट बताया कि 2 जून 1993 को पिथना गांव में खेत में काम करने के सवाल पर पड़ोसी मोहम्मद एेनुल हक ने झगड़े के बाद थप्पड़ मारने के आरोप का मुकदमा दर्ज करा दिया.

अबु बकर के वकील की दलील पर कोर्ट ने माना कि मुकदमे में इतनी देरी ठीक नहीं. इससे तो आम लोगों को न्याय पर भरोसा उठ जाएगा. तारीख पर तारीख लेकर मुकदमों को लंबा खींचने का वक्त चला गया. वकीलों को भी इस पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने सहायक अभियोजन पदाधिकारी को भी कहा कि पुराने मामले में जल्दी गवाही के लिए त्वरित कार्रवाई करें. संबंधितों को नोटिस-समन भेजकर बुलाया जाए.

क्या है भादवि की धारा 143

जो कोई विधि विरुद्ध जमावड़े का सदस्य होगा, उसपर आरोप साबित होने के बाद छह माह की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा.

क्या है भादवि की धारा 323

जो व्यक्ति जान बूझकर किसी दूसरे व्यक्ति या व्यक्तियों को मामूली रूप से चोट पहुंचाता है. आरोप साबित होने पर एक साल तक की कैद या एक हजार रुपये बतौर जुर्माना या दोनों से दंडित किया जायेगा.

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