बेगूसराय बिजली विभाग के अधिकारियों के नाकामी के कारण दलाली अपने चरम पर

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बेगूसराय : बिजली विभाग की लापरवाही के कारण बिजली कम्पनी और सरकार को राजस्व की घाटा सहनी पर रही है |उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन की मंजूरी तो 6 महीना पूर्व मिल जाती है लेकिन उसे न तो पोल दिया जाता है न ही तार दिया जाता है |मीटर लगाने का नाम पर कोई न कोई बहाना मार देते हैं कभी कहते हैं उस अधिकारी की मजूरी नहीं है तो कभी उस अधिकारी की  |पोल न मिलने के कारण उपभोक्ता बांस गाड़ के एवं  खुद का तार खरीदकर घर तक बिजली कनेक्शन ले जातें हैं |लेकिन मौसम बिगड़ने के चलते जब बांस टूट जाता है तब उपभोक्ता फिर एक बार बिजली ऑफिस का चक्कर लागतें हैं लेकिन वही फिर ढ़ाक के तीन पात वाली बात हो जाती है |अधिकारी कोई न कोई बहाना बनाकर उपभोक्ता की शिकायत को टाल जातें हैं |मजबूर होकर  उपभोक्ता दलालों के चक्कर में आ जातें हैं फिर दलाल उपभोक्ता के मजबूरी का फायदा उठाकर मोटी रकम वसूलते हैं |दलाल पोल के लिए प्रति उपभोक्ता 5000 रुपया लेतें हैं और तार के लिए  प्रति उपभोक्ता  1000 रूपये लेतें हैं | उपभोक्ता तो बिना मीटर के सालों से बिजली उपयोग कर रहें हैं और सरकार को भारी राजस्व का घाटा हो रहा है |

सूत्रों के खबर के अनुसार  बिचौलिए की मिलीभगत अधिकारियों से होती है और अधिकारी  बिचौलियों से मिलकर जमके चांदी काट रहें हैं |जब संवाददाता ने इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट इंजिनियर से बार -बार इस बारे में बात की तो  सारे सवालों को टाल गए और बाद में मीडिया को धमकाकर बोले कि उन्हें  मीडिया की  कोइ परवाह नहीं है जो लिखना है लिख सकते हैं |जब इन्हें मीडिया की परवाह नहीं है तो भोली भाली जनता की आवाज को सरकार तक ले जाया जाएगा |फिर संवाददाता ने कहा कि सरकार के राजस्व घाटा का जिम्मेदार कौन होगा तो इंजिनियर ने कहा कि इन सब के बारे में सारे अधिकारी चाहे  NBPDCL के मालिक हो या नीचे चपरासी सबको पता है |इसलिए हमें कोई परवाह नहीं है |

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