अमृतसर रेल हादसा : पकड़ा गया ड्राइवर का 4 झूठ ,खुद अपनी बातों में फंस गया

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अमृतसर : अमृतसर में रावण दहन के दौरान 61 लोगों की मौत की जिम्मेदार बनने वाली ट्रेन के ड्राइवर के दावों को चश्मदीदों ने कोरा झूठ करार दिया है। दशहरे के दिन 19 अक्तूबर को हुए हादसे को लेकर ट्रेन ड्राइवर ने पुलिस और रेलवे अधिकारियों को दिए बयान में कहा था कि उसने ट्रेन को इसलिए नहीं रोका था, क्योंकि रावण दहन को देखने जुटी भीड़ में से कुछ लोग ट्रेन पर पत्थर फेंक रहे थे।

पहला झूठ 

हादसे के समय मौजूद रहे शैलेंद्र सिंह शैली ने कहा, मैं मौके पर था। ट्रेन के रुकने की बात तो दूर, उसकी रफ्तार भी धीमी नहीं हुई थी। शैली अमृतसर के वार्ड नंबर 46 के नगर निगम पार्षद हैं। उन्होंने ड्राइवर पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। शैली ने कहा, ऐसा लग रहा था कि ड्राइवर हमें कुचलना चाहता था। ट्रेन वहां से चंद सेकंडों में गुजर गई। क्या यह संभव है कि जब आसपास इतने सारे लोग मर रहे हों या घायल हों तो हम ट्रेन पर पत्थर फेंकेंगे। क्या इतने दर्दनाक हादसे के दौरान तेजी से गुजर रही ट्रेन पर पत्थर फेंकना संभव है। ड्राइवर झूठ बोल रहा है।

दूसरा झूठ:

ट्रेन में जो  हेडलाइट लगी होती है उससे 2 km आगे दिखाई देती है लेकिन ऐसा क्या हुआ कि ड्राइवर को इतनी भीड़ दिखाई नहीं दी 

तीसरा झूठ 

DMU ट्रेन से पहले दो सुपरफास्ट ट्रेन गुजरी जिसकी स्पीड 20-25 थी तो इस ट्रेन की स्पीड क्यों इतनी हो गयी थी |कहा जा रहा या तो ड्राइवर नया होगा या उससे चूक हो गयी होगी

चौथा झूठ 

रेल अधिकारियों की मानी जाए तो हादसे की जिम्मेदार डीजल इलेक्ट्रिक्ल मल्टीपल यूनिट (डेमू) ट्रेन की अधिकतम गति 96 किलोमीटर प्रति घंटा है। इस गति से चल रही खाली ट्रेन इमरजेंसी ब्रेक लगने पर अधिकतम 300 मीटर दूर जाकर रुक जाती है। वहीं सवारियों से भरी डेमू अधिकतम 600 मीटर दूर रुकती है। डीआरएम फिरोजपुर के मुताबिक, ट्रेन की रिकॉर्ड की गई आखिरी रफ्तार 68 किलोमीटर प्रति घंटा थी। ऐसे में वह इससे भी पहले रुक सकती थी।