पिता करते हैं मजदूरी लेकिन बेटी ने किया ऐसा कमाल कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति कोविंद को भी देना पड़ा इन्हें मेडल

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राय बरेली : रायबरेली में 7 फरवरी 2000 को जन्मी सुषमा वर्मा फैमिली के साथ लखनऊ के आशियाना में रहती हैं। पिता तेजबहादुर बीबीएयू में सैनिटेशन असिस्टेंट(चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) और मां छाया देवी हाउस वाइफ है। तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर है।

– सुषमा बताती हैं, ”मेरे जन्म के समय पापा को 5 से 6 हजार रुपए सैलरी मिलती थी। उसी में परिवार का खर्च चलता था। सभी की फीस जमा करने में काफी प्रॉब्लम फेस करनी पड़ी थी lपिता तेजबहादुर बताते है, ”मैं रोजाना शाम को काम से आने के बाद रामचरित मानस का पाठ करता था।”

– ”बेटी भी साथ बैठती थी। धीरे-धीरे वो रामचरित मानस की चौपाई पढ़ने लगी। उस समय उसकी उम्र केवल 2 साल 3 महीने की थी।”

– ”2 साल की उम्र में बेटी ने लखनऊ के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में 3 सौ लोगों के बीच रामायण का पाठ पढ़कर सुनाया था।”
– ”धीरे-धीरे 5 साल की उम्र में वो अपने भाई की 7th की किताबें पढ़ लेती थी। पढ़ाई में इंटरेस्‍ट के चलते 5 साल में उसका एडमिशन 9वीं में कराने की कोशिश की।”

– ”2007 में लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इन्हें 10वीं पांस करने वाली सबसे कम उम्र की स्टूडेंट घोषित किया। उस वक्त इनकी उम्र 7 साल, तीन महीने और 28 दिन की थीं।”

कभी टाइम टेबल बनाकर नहीं की पढ़ाई

– सुषमा ने बताया ”मैंने कभी टाइम टेबल बनाकर पढ़ाई नहीं की। एक बार टाइम टेबल बनाया था, लेकिन जब पढ़ने का समय होता तो मन ही नहीं लगता था।”

– ”इसीलिए मैंने हमेशा जब मन हुआ तभी पढ़ाई की। स्कूल में हमेशा ये सोचकर जाती थी कि वहां पर केवल पढ़ाई ही करनी है। इसके साथ होमवर्क पर जरूर फोकस करती थी।”

– ”11 साल में सीपीएमटी का एक्जाम दिया, लेकिन एज कम होने की वजह से मेरा रिजल्ट रुक गया। तब बहुत दुख हुआ था।”

– ”इंट्री भले ही न मिलती लेकिन मेरा रिजल्ट तो देना चाहिए था। जिससे मुझे पता चलता कि मैंने पेपर में कितना सही किया था।”

– ”सीपीएमटी का रिजल्ट नहीं आया तो मैंने 13 साल में बीएससी किया। बायोलॉजी में इंटरेस्ट था, इसलिए मैंने 15 साल में माइक्रोबायोलॉजी से एमएससी में टॉप किया।”

जमीन बेचकर एमएससी में पापा ने एडमीशन कराया

– आंखों में आंसू लेकर सुषमा ने बताया,”पापा मजदूर थे। कभी उनको काम मिलता था तो कभी नहीं। जब मेरा एमएससी में एडमीशन होना था, तब फीस के पैसे नहीं थे।”

– ”उन्होंने जमीन बेचकर मेरा एडमीशन कराया। कभी-कभी लगता है, मुझे पापा की हेल्प करनी चाहिए।”

– ”बीबीएयू से माइक्रोबायोलॉजी सब्जेक्ट से पीएचडी कर रही हूं। पढ़ाई में आर्थिक बाधा न पड़े, इसके लिए कॉलेज के वीसी (वाइस चांसलर) ने वहीं पर इनके पिता को सेनेटरी असिस्टेंट की नौकरी दे दी।

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