सीबीएसई पेपर लीक में बड़ा खुलासा :जानिए पीएचडी मास्टरमाइंड ने कैसे किया था पेपर लीक और किस फायदे के लिए दिया था अंजाम

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नई दिल्ली : सीबीएसई के 12वीं कक्षा के अर्थशास्त्र के पेपर लीक मामले में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के संतोषगढ़ निवासी मास्टरमाइंड राकेश शर्मा ने अपनी रिश्तेदार के एक बच्चे को पास कराने के चक्कर में पेपर लीक कर दिया।
उसने सबसे पहले इसी महिला रिश्तेदार के मोबाइल पर हाथ से लिखे पेपर की एक कॉपी व्हाट्सएप पर भेजी थी। उस महिला ने ही इसे आगे फार्वर्ड कर दिया। इसके एक दिन बाद ही यह पेपर देश भर में तेजी से वायरल होकर सीबीएसई के दिल्ली मुख्यालय तक पहुंच गया।पुलिस सूत्रों के अनुसार राकेश ने पहले तो यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के लॉकर से चुपके से अर्थशास्त्र के पांच पेपरों का छोटा बंडल उड़ा लिया। बाद में इस पेपर को अपने यहां ट्यूशन पढ़ने वाली एक छात्रा को दे दिया। उस छात्रा ने इस पेपर को अपने हाथ से कॉपी किया और राकेश को दे दिया। इसके बाद राकेश ने कॉपी किए हुए हाथ से लिखे पेपर के फोटो खींचे और महिला रिश्तेदार को व्हट्सएप कर दिए।

इसी महिला ने इसे आगे औरों को भेज दिया जो पूरे देश भर में वायरल हो गया। राकेश ने यह पेपर परीक्षा से तीन दिन पहले 23 मार्च को लीक कर दिया था। क्राइम ब्रांच दिल्ली की टीम ने जैसे ही व्हट्सएप मैसेज की जांच की तो पता चल गया कि हाथ से लिखा यह पेपर राकेश के मोबाइल से ही सबसे पहले भेजा गया।
पुलिस के मुताबिक 23 मार्च को डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल में बतौर पीजीटी तैनात राकेश कुमार इसी स्कूल के ऑफिस क्लर्क अमित शर्मा और चपरासी अशोक कुमार को साथ लेकर कंप्यूटर साइंस और आईपी के पेपर लेने गया।

उसी दौरान राकेश शर्मा ने बैंक के लॉकर से 26 मार्च को होने वाली जमा दो कक्षा की अर्थशास्त्र परीक्षा के पेपर का एक बंडल चुपके से खिसका लिया। राकेश शर्मा ने यह बंडल उसके साथ आए अमित शर्मा और अशोक कुमार को थमा दिया। इन दोनों ने रास्ते में कार में ही इस पेपर को खोला और अपने मोबाइल से इसकी एक कॉपी राकेश को दे दी।

पैसों का नहीं हुआ कोई लेन-देन
सीबीएसई के पेपर लीक होने के पीछे पैसों के लेन-देन की कोई भूमिका नहीं है। मास्टरमाइंड का इरादा इसे आगे औरों को बेचने का नहीं था। उसे तो यह तक अंदेशा नहीं था उसका भेजा एक मैसेज पूरे देश में वायरल हो जाएगा। पुलिस के सूत्र बता रहे हैं कि अभी तक की जांच और आरोपी से हुई पूछताछ में पैसों के लेन-देन का कोई मामला सामने नहीं आया है।
पुलिस के मुताबिक 23 मार्च को डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल में बतौर पीजीटी तैनात राकेश कुमार इसी स्कूल के ऑफिस क्लर्क अमित शर्मा और चपरासी अशोक कुमार को साथ लेकर कंप्यूटर साइंस और आईपी के पेपर लेने गया।

उसी दौरान राकेश शर्मा ने बैंक के लॉकर से 26 मार्च को होने वाली जमा दो कक्षा की अर्थशास्त्र परीक्षा के पेपर का एक बंडल चुपके से खिसका लिया। राकेश शर्मा ने यह बंडल उसके साथ आए अमित शर्मा और अशोक कुमार को थमा दिया। इन दोनों ने रास्ते में कार में ही इस पेपर को खोला और अपने मोबाइल से इसकी एक कॉपी राकेश को दे दी।

 

अमित ने पेपर का बंडल खोला और राकेश को व्हाट्स ऐप किया- ऊना के जखेड़ा निवासी अमित शर्मा पिछले 16 वर्ष से डीएवी स्कूल में क्लर्क है। वह राकेश कुमार के साथ बैंक के स्ट्रांग रूम में पेपर लेने जाता था। अमित ने ही बंडल से अर्थशास्त्र के पेपर को निकाला था और फोटो खींचकर राकेश को व्हाट्स ऐप किया था। संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार ने बताया कि अब तक की पूछताछ में अमित शर्मा ने पैसे लेने से इनकार किया है। उसका कहना है कि राकेश कुमार उसका सीनियर है। इस कारण उसने बात मान ली थी। वह दस वर्ष से राकेश कुमार के साथ काम कर रहा है।

चपरासी अशोक ने भी दोनों आरोपियों का दिया साथ
ऊना के जखेड़ा निवासी अशोक कुमार वर्ष 2003 से डीएवी स्कूल में चपरासी है। वह राकेश कुमार की सहायता करता था। अशोक कुमार ने भी पेपर लीक मामले में पैसे लेने की बात से इनकार किया है। अशोक का कहना है कि उसने सीनियर राकेश कुमार के कहने पर साथ दिया था। अशोक भी अमित के साथ पेपर लेने बैंक गया था। राकेश से पेपर लेने के बाद अमित और अशोक ने कार में पेपर का बंडल खोला और उसकी एक कॉपी उसे भेज दी।
अगर स्ट्रांग रूम से बाहर निकलने से पहले ठीक से चेक किया जाता तो अर्थशास्त्र का पेपर न बाहर जाता और न ही लीक होता। दूसरा पेपर निकालते समय कोई वीडियोग्राफी की गई या नहीं। सीबीएसई पेपर लीक प्रकरण में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ऊना शाखा की सुरक्षा प्रणाली पर भी सवालिया निशान लग गया है


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